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बड़े भाई साहब

CBSE Class 10 Hindi (Course B) • Sparsh Part-2 • Prose (Gadya)

पाठ का सारांश (Summary/Context):

'बड़े भाई साहब' (Elder Brother) मुंशी प्रेमचंद की एक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक कहानी है। यह कहानी दो भाइयों (बड़े भाई साहब और छोटे भाई/लेखक) के बीच के रिश्ते, उम्र के अंतर, और 'शिक्षा प्रणाली' (Education System) पर आधारित है। बड़े भाई साहब लेखक से उम्र में 'पाँच साल' बड़े हैं, लेकिन दर्जे (Class) में केवल 'तीन साल' आगे हैं। वे दिन-रात पढ़ते रहते हैं, पर बार-बार फेल हो जाते हैं। दूसरी ओर, छोटा भाई दिनभर खेल-कूद करता है और केवल इम्तिहान के समय पढ़कर 'प्रथम श्रेणी' (First Division) में पास हो जाता है। धीरे-धीरे दोनों बीच केवल 'एक दर्जे' का अंतर रह जाता है, जिससे छोटे भाई में थोड़ा अभिमान (Proud) आ जाता है। अंत में, बड़े भाई साहब बहुत ही सुंदर तरीके से उसे समझाते हैं कि किताबी ज्ञान (रटने वाली पढ़ाई) से अधिक महत्वपूर्ण 'जीवन का अनुभव' और 'बुजुर्गों का सम्मान' होता है।

1. लेखक का परिचय (Author Introduction)

लेखक: प्रेमचंद (Premchand)

धनपतराय श्रीवास्तव, जिन्हें 'मुंशी प्रेमचंद' के नाम से जाना जाता है, हिंदी साहित्य के सबसे महान उपन्यासकार (Novelist) और 'उपन्यास सम्राट' हैं। उनका जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के लमही गाँव में हुआ था। उनकी कहानियों में भारतीय समाज की ज़मीनी हकीकत, किसानों का दर्द, गरीबी, रूढ़िवाद और मानवीय संवेदनाओं का एकदम सजीव चित्रण मिलता है। उनकी प्रमुख रचनाएँ: गोदान, गबन, सेवासदन, कर्मभूमि, रंगभूमि (उपन्यास) और 300 से अधिक कहानियों का संग्रह 'मानसरोवर' (8 भागों में) है। उनकी भाषा अत्यंत सरल, मुहावरेदार (Idiomatic) और आम बोलचाल (उर्दू-मिश्रित हिंदी) वाली है।

2. प्रमुख पात्र (Main Characters)

3. कहानी के प्रमुख घटनाक्रम और वैचारिक बिंदु (Key Episodes & Thoughts)

4. महत्वपूर्ण कथन एवं उनके अर्थ (Important Quotes)

"समझ किताबें पढ़ने से नहीं आती, दुनिया देखने से आती है।"

= अर्थ: यह कहानी का सबसे बड़ा 'संदेश' (Message) है। शिक्षा (Education) का मतलब सिर्फ़ इतिहास को रटना या गणित के कठिन सवाल हल करना नहीं है। जो ज्ञान हमें जीवन के 'कठोर अनुभवों' (Practical Expreiences), बड़े-बुज़ुर्गों के साथ रहने और घर-गृहस्थी की ज़िम्मेदारियों को सँभालने से मिलता है, वह 'बचपन की स्कूली किताबों' के ज्ञान से कहीं अधिक काम आता है। माता-पिता बिना डिग्री (Degree) के भी घर चलाना अच्छे से जानते हैं।

"अभिमान तो रावण का भी न रहा, तुम तो किस खेत की मूली हो!"

= अर्थ: जब छोटा भाई खेलते-कूदते हुए भी कक्षा में प्रथम (First) आता है, तो उसमें थोड़ा 'घमंड' (अहंकार) आ जाता है कि अब उसे बड़े भाई की डाँट सुनने या अधिक पढ़ने की आवश्यकता नहीं है। इस पर बड़े भाई साहब रावण ('चक्रवर्ती राजा' जिसे अपने बल पर घमंड था) का उदाहरण देते हुए समझाते हैं कि अहंकार (घमंड) किसी का नहीं टिकता; घमंड करने वाले इंसान की न केवल हार होती है, बल्कि उसका पूरा विनाश हो जाता है। अतः बच्चों को 'सफलता' पर कभी घमंड नहीं करना चाहिए।

BOARD EXAM QUESTIONS

प्रश्न 1: 'बड़े भाई साहब' ने तत्कालीन (उस समय की) शिक्षा प्रणाली की किन कमियों की ओर ध्यान दिलाया है? उनके विचारों से आप कहाँ तक सहमत हैं?

उत्तर: बड़े भाई साहब ने उस समय की अंग्रेज़ी शिक्षा प्रणाली की निम्नलिखित कमियों (दोषों) को उजागर किया है:
1. रटने वाली (Rote-learning) पद्धति: शिक्षा में केवल 'रटने' पर ज़ोर दिया जाता है, समझने पर नहीं। जैसे- इंग्लैंड के आठ 'हेनरी' राजाओं के नाम रटना, इतिहास में दर्ज़नों विलियम और जेम्स के नाम रटना, जो किसी काम के नहीं हैं।
2. व्यर्थ की कठोरता: ज्यामिति (Geometry) में अगर छात्र 'अ ब ज' की जगह 'अ ज ब' लिख दे, तो उसे फेल कर दिया जाता है, जबकि इसका कोई व्यावहारिक अर्थ नहीं है।
3. रचनात्मकता की कमी: हिंदी के निबंधों के नाम पर आधे पन्ने की बात (जैसे- समय की पाबंदी) को ज़बरदस्ती चार पन्नों में लिखने को कहा जाता है, जो विद्यार्थियों (Students) के दिमाग़ को थका देता है।
सहमति: मैं बड़े भाई साहब के विचारों से पूरी तरह सहमत हूँ। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो हमें जीवन जीना, समस्याओं का सामना करना और रचनात्मक (Creative) सोचना सिखाए, न कि केवल तोते की तरह रटना सिखाए। शिक्षा 'व्यवहारिक' (Practical) होनी चाहिए।


प्रश्न 2: "मेरा (बड़े भाई का) भी मन पतंग उड़ाने को करता है।"- बड़े भाई साहब की इस बात से उनके स्वभाव के किस पक्ष (पहलू) का पता चलता है?

उत्तर: 'बड़े भाई साहब' हमेशा गंभीरता का चोला ओढ़े रहते थे। परंतु "मेरा भी मन पतंग उड़ाने को करता है" इस वाक्य से पता चलता है कि वे कोई महापुरुष या बूढ़े नहीं हैं; उनके अंदर भी वास्तव में एक 'छोटा और चंचल बच्चा' (Childishness) छिपा हुआ है। उनकी उम्र केवल 14 वर्ष थी, और इस उम्र में हर बच्चे का मन खेलने-कूदने और पतंग उड़ाने का करता है। परंतु, एक 'बड़े भाई (रक्षक) की ज़िम्मेदारी और आदर्श' (Sense of responsibility) निभाने के कारण वे अपनी इच्छाओं को दबा (मार) लेते हैं ताकि वे स्वयं गलत रास्ते पर न जाएँ और छोटे भाई के सामने एक 'अच्छा उदाहरण' बन सकें। यह वाक्य उनके 'त्याग' (Sacrifice) और गहरे 'भ्रातृ-प्रेम' (Brotherly love) को दर्शाता है।


प्रश्न 3: छोटे भाई (लेखक) के मन में बड़े भाई साहब के प्रति श्रद्धा (Respect) क्यों उत्पन्न हुई?

उत्तर: जब छोटा भाई दूसरी बार प्रथम श्रेणी (First Division) में पास हुआ और बड़े भाई साहब पुनः फेल हो गए, तो छोटे भाई में थोड़ा अभिमान 'घमंड' आ गया था। एक दिन जब वह पतंग लूटने के लिए भाग रहा था, तब उसकी टक्कर बड़े भाई साहब से हो गई।
उस दिन बड़े भाई साहब ने उसे बीच बाज़ार में डाँटते हुए जो 'अम्मा, दादा और हेडमास्टर की माँ' का उदाहरण दिया, और यह स्पष्ट किया कि "समझ किताबें पढ़ने से नहीं आती, दुनिया देखने (अनुभव) से आती है", उसने छोटे भाई की आँखें खोल दीं। बड़े भाई साहब ने बताया कि मेरे पास 5 साल का अधिक 'जीवन का अनुभव' है जो डिग्री से बड़ा है और मैं हमेशा तुम्हारे भले के लिए ही तुम्हें टोकता हूँ। बड़े भाई का यह 'दार्शनिक और सच्चा प्रेम' (Philosophical thought and care) देखकर छोटे भाई का घमंड टूट गया और उसका सिर 'सच्चे आदर और सम्मान' (श्रद्धा) से झुक गया।